AC में capacitor का काम compressor और fan motor को स्टार्ट करने और उन्हें स्मूथ तरीके से रन कराने में मदद करना होता है। पुराने ACs में अलग-अलग capacitors होते थे – एक start capacitor और एक run capacitor, लेकिन आजकल ज़्यादातर यूनिट्स में dual capacitor आता है जो दोनों काम करता है।

Capacitor के टाइप्स:
→ Start Capacitor:

केवल मोटर स्टार्ट करते समय एक्टिव होता है

High µF rating (80µF – 200µF)

सिर्फ कुछ सेकंड के लिए चलता है

पुराने ACs के compressor circuit में यूज़ होता था

→ Run Capacitor:

मोटर को लगातार स्मूथ चलाने के लिए

Low µF rating (5µF – 60µF)

Compressor और fan motor दोनों में यूज़ होता है

→ Dual Capacitor:

एक ही बॉडी में दो capacitors – एक compressor के लिए और एक fan के लिए

3 terminals होते हैं: C (common), HERM (compressor), और FAN

आजकल के split ACs में commonly use होता है

Technician के लिए जरूरी पॉइंट्स:
→ Compressor humming करे लेकिन स्टार्ट न हो, तो सबसे पहले capacitor चेक करो
→ Fan blade हिले लेकिन न चले या धीमा चले तो fan capacitor weak हो सकता है
→ Multimeter से capacitance µF में measure करो – actual value, rating से 5-10% कम है तो चल सकता है, लेकिन उससे ज्यादा हो तो बदलना चाहिए
→ Capacitor फूला हुआ हो, लीकेज हो, या वायरिंग जली हो – तो तुरंत बदलो
→ Dual capacitor बदलते समय wiring सही टर्मिनल में लगे या नहीं, इसे confirm करो – गलत wiring से compressor या fan जल सकता है

ध्यान रखने वाली बातें:
→ New capacitor की µF और voltage rating, पुराने से match होनी चाहिए
→ 370V वाले capacitor को 440V से रिप्लेस किया जा सकता है – लेकिन µF से ज्यादा फर्क नहीं होना चाहिए
→ Capacitor को discharge किए बिना हाथ न लगाओ – इसमें shock लग सकता है
→ Spare capacitor हमेशा carry करना technician के लिए फायदेमंद रहता है – emergency में जल्दी रिप्लेस किया जा सकता है